My India Green India

Almost everyday people discuss about environmental issues on different mediums and also really want to contribute to solve the issues but somehow fail to take out time from their hectic schedule. We understand your problem hence we will help you.

HOW : We are starting an initiative “Mera India Green India”. On any of your special occasion (Birthday’s, Anniversaries, Valentines,First Salary anything) give us a call,tell us which tree and how many trees you want to plant and we will do it for you. Buying saplings from nursery,selection of location (unless you want it in some specific place), plantation,maintenance of trees will be taken care by us. We will give your name to that tree/trees. You just need to pay for the service and sapling.So from next time instead of giving an excuse give us a call. Make your special day memorable and special for the world 😊

For Mumbai, Nikesh Jilthe : 90 96 133400
Nagpur, Snehal Wankhede : 9930322101

Last year on environment day 05.06.2016 we had taken a pledge to do plantation every Sunday and till now 47 Sunday’s are completed.

Friend’s this time only All the Best will not work,we will also need your support which starts by spreading the message. Share this with your friends family colleagues and enemies too even are part  of the Mother Earth.

#SaveEnvironment #MeraIndiaGreenIndia #TreePlantation #India #Joinhands #payback

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Pehli Iftari aur Chasme ka Paani (पेहली इफ्तारी और चश्मे का पानी)

IMAG090630 जून 2016 की वो शाम, हलकी सी ठण्ड और कारगिल के एक होटल का वो बरामदा.

तोशिब : आ गए आप कारगिल देखकर,कैसा लगा आपको हमारा कारगिल, यकीन हुआ आपको की पाकिस्तान भी दिखता है यहाँ से.

मैं : मज़ा आया कुछ नए लोगो से भी मिली, नमकीन चाय भी पि. अच्छा खाना  कहा अच्छा मिल जायेगा यहाँ

तोशिब: मैडम इफ्तारी खायी है आपने कभी

मैं :नहीं आज तक तो नहीं खायी

तोशिब: अच्छा खाना पसंद करेंगी आप, घर से शाम में आने ही वाली है आपके लिए भी मंगवा देते है

मैं :हां चलेगा

तोशिब: तो आप फ्रेश हो जाइये जैसे ही इफ्तारी आती है मैं आपको बुलाने आ जाऊंगा

पेहचान  इनसे तब तक बस इतनी थी की कुछ दो घंटे पेहले इनके होटल में रूम बुक किया था. रूम बुक करने में मदद मिली थी २ राइडर्स की, जो बस राह चलते युही मिल गए थे. मुझे कुछ समझ नहीं रहा था की कारगिल में कहा ठहरा जाये तो इन दोनों राइडर्स की मदद ले ली थी. होटल के सामने ही था तोशिब का जनरल स्टोर्स. होटल और जनरल स्टोर्स दोनों ही सँभालने की जिम्मेदारी तोशिब  पर. २ घंटे की पहचान में बात हमने की थी बस १५ min, तोशिब ने मेरी मदद की थी मेरे वेगो पर बंधे सामान को निकालकर रूम तक पोहोचाने में और फिर कारगिल में क्या देखा जा सकता है ये बताने में. जब कारगिल देखकर वापस लौटी तो पता नहीं था अपनी पहली इफ्तारी खाने का मौका मिलेगा

रूम पर जैसी ही पोहोची थकान की वजह से नींद आ गयी. दो तीन बार दरवाज़ा खट खटाने की आवाज़ आयी पर नींद से उठकर दरवाज़ा खोलने की इच्छा ना हुयी. और आख़िरकार उठकर जब घडी देखि तो ८ बज चुके थे. उठकर फ्रेश होती की फिर से दरवाज़ा खट खटाने की आवाज़. तोशिब  खाना खाने बुलाने आया था. १० min बाद जब निचे दुकान पर पोहोची तो पता चला मेरे इंतज़ार में तोशिब ने रोज़ा नहीं तोडा है. आप मेहमान है आपके पेहले मैं कैसे खा लेता. दुकान पर तोशिब के अलावा और एक उनके पहचान वाले जिनका टूर्स एंड ट्रेवल्स का बिज़नस था वो भी मौजूद थे. हमारी बात चित शुरू हो उसके पेहले तोशिब  ने जमीन पर ही मेरे बैठने के लिए एक चटाई बिछाई, थैले में से सब्ज़ी मेरे सामने रखी और फिर वही थैला मेरे सामने रखकर उस पर रोटी रख दी.

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इफ्तारी

और फिर शुरू हुआ बातो का सिलसिला. दुकान पर मौजूद मेहमान मुझे लेह में रुकने के लिए अलग अलग होटल बता रहे थे. तोशिब के हाव भाव से मुझे समझ आ रहा था की मैंने उनकी बातो में ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. और बिच में ही होटल के टोपीक को रोककर तोशिब ने पूछा मैडम आपने कभी चश्मे का पानी पिया है, बोहोत ही मीठा पानी होता है और मिनरल वाटर से भी अच्छा. मुझे ये समझ नहीं आ रहा था की आखिर चश्मे का पानी होता क्या है. और तोशिब उसका हिंदी शब्द ढूंढ नहीं पा रहा था.  तभी हमारे 3 की मेहफिल में आये एक और शक्श रात के 8 बजे के अँधेरे और सनाटे को चीरते हुए. नाम तो उनका  याद नहीं पर ये थे तोशिब के  बचपन के दोस्त. इन्होंने अपनी SBI PO की नौकरी छोड़ स्कूल में टीचर बन ना पसंद किया. कह रहे थे नहीं होता मैडम इतना काम हमसे जाने का समय तो था आने का नहीं, लाइफ भी तो कोई चीज़ है. वो नौकरी ही किस काम की जिसके चलते सुकून से शाम को दोस्तों के साथ वक़्त ही न बिताने मिले,छोड़ दी मैंने नौकरी. काश मेरे लिए भी इतना ही आसान होता नौकरी छोड़ पाना.

और इन शख्स ने बताया मुझे चश्मे का पानी मतलब झरने का पानी. उस पानी से मीठा और स्वाद वाला पानी मैंने आज तक नहीं पिया है,प्राकृतिक ठंडा पानी. बातो का काफिला फिर थोड़ा और आगे बढ़ा. मैडम मेरे दोस्त का भी पास ही में होटल है, रात को वाहा कैंपिंग भी होती है. मैडम अभी धुप है तो हम सब्ज़िया सुखाकर रख देते है ताकि ठण्ड में खा सके. वरना तो बस दाल उबालकर खाओ ऐसा लगता है पेट में पूरी दाल दाल ही हो गयी है. रास्ते सभी बंद हो जाते है बर्फ की वजह से तो कुछ मिलना भी मुश्किल. बड़ी मुश्किल से निकलती है ठण्ड,कुछ काम भी नहीं मिलता.

कारगिल के उस जनरल स्टोर में जमीन पर चटाई पर बैठी हुई मैं अकेली इन दोनों लड़को की बाते सुन रही थी. रास्ते पर लड़की तो दूर की बात है पर कोई इंसान भी उस समय मौजूद नहीं था. बस कुछ कुत्तो के भौकने की आवाज़.फिर भी जितना महफूज मैं अपने घर पर बैठकर खुदको मेहसूस करती उतना ही महफूज मुझे वाहा लग रहा था. घर से दूर भी कुछ घर जैसा लग रहा था. ना तो कोई डर था ना ही कोई हिचक और ना शंका. होना भी शायद लाजमी ना था क्योंकि फॉर्मेलिटी कम और अपनापन ज्यादा था,एक रिस्पेक्ट थी. रिस्पेक्ट अपने काम के लिए,अपने मेहमान के लिए,अपनी संस्कृति के लिए. वो काफी था मुझे विश्वास दिलाने के लिए. कारगिल के उस शहर की वो दिखने में तो साधारण दावत पर मुझसे पूछा जाये तो ऐसी दावत के लिए किसी 5 सितारा होटल की दावत छोड़ने का मलाल न होगा. वाहा होता है एक दिखावा सजावट का काटे छुरी का टेबल चेयर का क्रोकेरी  का अंग्रेजी का किसको प्रभावित करने का यहाँ था बस अपनापन.ना कोई ढोंग ना कोई दिखावा बस सादगी और सरल  निश्छल  मन. अगर ये खूबसूरती साथ हो तो किसी और श्रृंगार की क्या कीमत.

बाते कुछ और भी होती पर दूसरे दिन जल्दी निकलना था इसलिए बातो का सिलिसिला वही ख़तम करना पड़ा . दूसरे दिन तोशिब ने सामान गाडी पर बाँधने में मेरी मदद की और दुआ के साथ “इंशाल्लाह आप जरूर कामयाब होंगे” अलविदा किया. वो इफ्तारी और चश्मे का पानी थी मेरी ईदी जो ईद के पेहले ही नसीब हो गयी थी.लौटूंगी शायद फिर कभी कारगिल, परिंदो की तरह.

युथ सेन्टर (Youth Center)

कुछ रिश्ते बनाते बनाते जहा पूरी ज़िन्दगी निकल जाती है वही कुछ रिश्ते बस एक मुस्कुराहट से ही बन जाते है. ऐसा ही कुछ प्यारा सा रिश्ता बना मेरा झाँसी से १६ km दूर बसे ओरछा गांव के बच्चो से.यु तो ओरछा में कई आकर्षण है पर मुझे जिसने सबसे ज्यादा आकर्षित किया वह है वाहा का “युथ सेन्टर” और वाहा के बच्चे. जितने मासूम ये बच्चे है उतने ही अनुशाषित भी. इस युथ सेण्टर की शुरुआत की फ्रेंड्स ऑफ़ ओरछा की आशा डिसूज़ा ने जो अल्मोड़ा,उत्तराखंड की निवासी है. जहा युथ सेन्टर की शुरुआत इन्होंने की उसे सँभालते ओरछा के होम स्टे के होस्ट के बच्चे है. आशा डिसूज़ा महीने में एक बार आकर नए नए गेम्स लाकर देती है और बच्चो को सिखाकर भी जाती है. उसके अलावा युथ सेन्टर में योगदान रहता है होम स्टे में रुके हुए मेहमानों का जो दुनियाभर से आते है और इन्हें कुछ नया सीखा जाते है.

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Wall Painting
युथ सेंन्टर खुलने का निर्धारित समय है दोपहर के ३ से ४ जिसमे करीब २० से २५ बच्चो के नाम रजिस्टर्ड है. इसे खोलने की जिम्मेदारी किसी टीचर मेंटर या गाइड की नहीं तो युथ सेन्टर की ही एक बच्ची खुशि जो ५ वि कक्षा में पढ़ती है उसे दी गयी है. गुरुवार जो की छुट्टी का दिन निर्धारित है उस दिन छोड़कर बाकि दिन अपने समय पर ये युथ सेन्टर खोल दिया जाता है. बिना अपनी ख़ुशी दीदी से परमिशन लिए ये बच्चे अंदर नहीं आते, अंदर आते ही गुड आफ्टरनून विश करते है .ये है सारे हमउम्र ही पर उस एक घंटे के लिए ख़ुशी दीदी उनकी टीचर बन जाती है जिसे वे बिना किसी जबरदस्ती और कोई न देख रहा हो तो भी आदर देना जानते है. अंदर आकर बिना कोई शोर किये बच्चे अपने लिए गेम्स सेलेक्ट करते है. गेम्स भी ऐसे जो उन्हें कुछ सिखाये जैसे मास्टरमाइंड पजल फिर कुछ देर इंग्लिश सीखते है और थोड़े आउटडोर गेम जैसे फोर बॉक्स और हर संडे ड्राइंग.

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Spider Man Puzzle जिसमे थोड़ा कॉन्ट्रिब्यूशन मेरा भी है 😉

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और काऊ की हैडलाइन पर ड्राइंग फ्लैग की

जहा उनका अनुशाषण ईमानदारी देखकर मैं अचम्भे में थी उतनी ही हैरानियत हुई उनकी बाते सुनकर.जब मैंने उनसे उनके सपनो के बारे में पूछा तो जवाब मिले पेंटर,नेवी,आर्मी,कलेक्टर और जो मेरा फेवरेट जवाब था मुझे ना पैसे कमाकर अमेरिका अफ्रीका घूमना है दुनिया देखनी है :). और फिर जब बात चली की स्कूल में पढाई के अलावा आप लोग और किन एक्टिविटीज में भाग लेते हो तो एक जवाब आया मैडम मुझे न डांस करना बोहोत पसंद  है और इस बार २६ जनवरी को पार्टिसिपेट भी करना था. पर ड्रेस लेने के लिए पापा के पास पैसे नहीं थे तो मैं नहीं कर पाया. इस पर मैं कुछ बोलू उसके पेह्ले ख़ुशी और बाकि बच्चो ने ही बोलना चालू कर दिया. अरे तो हर बार जरूरी थोड़ी है की नयी ड्रेस ली जाये अपने दोस्तों से भी तो ली जा सकती है. मुझे भी “बुमरो बुमरो” डांस में ड्रेस की जरुरत पड़ी थी तब मैंने अपने दीदी से ड्रेस ले लिया था. और पैसे हम भी तो बचा सकते है,अगर कोई रिश्तेदार या हमारे घर आये  मेहमान पैसे देकर जाते है तो जमा करके रखना चाहिये. फिर जब कभी जरुरत पड़े तो उसी में से निकाल सकते है. अगर कभी मम्मी पापा को पैसो को लेकर टेंशन हो तो उन्हें भी मदद कर सकते है,बिना ये सोचे की ये बस हमारे पैसे है. मैंने १३०० रूपए जमा कर लिए थे उसमे से ५०० की मैंने ड्रेस खरीद ली अपने लिए और ८०० अभी भी बाकि है,तुम भी ऐसे कर सकते हो.

इन बच्चो की समझदारी बस इतनी ही नहीं तो जहा आधी दुनिया धर्म के नाम पर लड़ती है वही ये सभी धर्म का आदर भी करना जानते है. बाहर खेलते खेलते किसीने “अल्लाह हु अकबर ” बड़ी ही मस्ती में गाना शुरू किया और उसी मस्ती में सारे बच्चे वैसे ही गाने लगे.2 ही सेकंड हुए होंगे की सब रुक गए और खुद ही सबने  सॉरी बोल दिया ये कहकर की “ये किसीके धर्म का गाना है उसका मजाक  नहीं उड़ाना चाहिए अगली बार हम ऐसा नहीं करेंगे”. खेलने के बाद इनका समय ख़तम होता है अटेंडेंस के बाद ही.

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Four Square

फक्र हो रहा था इन बच्चो से मिलकर। जहां शहर के बच्चो को देखकर हमेशा एक सोच में पढ़ जाती हु की कहा खो गया है इनका बचपन, वही उस छोटे से गाँव के कुछ बच्चो को देखकर फिर बच्चा बन जाने की इच्छा जाग उठी. ख़ुशी हो रही थी ये देखकर की आज भी ऐसा बचपन कही जिन्दा है. युथ सेन्टर पर जाकर मेरी कोशिश चालू थी की इन्हें कुछ नया सिखाकर जाऊ. पर हुआ कुछ उल्टा दो दिन के उस एक एक घंटे ने मुझे  ही बोहोत कुछ सीखा दिया. उन छोटे बच्चो को देखकर लगा था इन्हें कुछ समझदारी की बाते सिखाकर जाउंगी पर मेरी समझदारी की बाते जाहा किताबो से निकालकर आयी होती वही उनकी समझदारी जिंदगी को जीकर आ रही थी.इसलिए निदा फाजली कहेते है की

घटाओ में निकलो धुप में नहाकर देखो

ज़िन्दगी क्या है किताबो को हटाकर देखो

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बच्चो की गैंग
अगर कभी ओरछा जाये तो अपना कुछ समय इस युथ सेन्टर में जरूर बिताये.उन बच्चो के लिए नहीं तो अपने लिए,कुछ नया जरूर सीखकर आएंगे.

पेहली मुलाकात

Happiness is when you are struggling to find a hotel to stay in an unknown city as they are skeptical of a girl travelling alone on her scooty and suddenly enters a Hero :p

तो ये कहानी है पटनीटॉप की. पोहोच तो गयी थी मैं पटनीटॉप अब परेशानी हो रही थी रहने की.२ होटल  में पूछ चुकी थी पर अकेली लड़की स्कूटी पे इतना दूर ५० सवाल और थोड़ा शक, होना भी जायज़ था लोगो पे विश्वास वैसे ही कम करते है आजकल हम और फिर एरिया जम्मू कश्मीर का. होशियारपुर से पटनीटॉप का सफर भी कुछ मिला जुला सा ही था कुछ अच्छा कुछ बुरा और अब फिर होटल के लिए मेहनत.निराश होकर एक होटल के निचे खड़ी ही थी तभी ४ रॉयल एनफील्ड गुजरी और उसमे से आखरी रॉयल एनफील्ड थोड़ा आगे जाकर रुकी राइडर ने हेलमेट का गिलास ऊपर किया और आवाज़ दि “ओये Snehal इधर आ” बाइक के पास जाकर देखा Vishal  there he was लाइफ में इतनी ख़ुशी कभी किसी और से मिलकर नहीं हुई थी जितनी उस दिन हुई वह भी पहली मुलाकात मे.हम दोस्त बने FB से राइडिंग के कॉमन पैशन की वजह से. Vishal मुम्बई से और मैं नागपुर से , नागपुर तो लोग कम ही आते है तो हमारा तय हुआ था की अगर कभी मैं  मुम्बई या फिर पुणे भी आयी तो हम मिलेंगे पर ये तीनो शहर छोड़कर हम मिले पटनीटॉप मे एक अनजान शहर मे.मिले और उसके बाद तो टेंशन की बात ही नहीं “चल तू हमारे साथ रहेगी हम ये होटल मे रुके है “. दुनिया बोहोत छोटी है और जब मुझपे मुसीबत आती है तो शायद और थोड़ी छोटी हो जाती है ;p.

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नमकीन चाय मीठी याद (Namkin Chai Mithi Yaada)

करगिल बॉर्डर से थोड़ा आगे हुंडरमान गाँव जो पाकिस्तान से 1971 वॉर में हमारे पास आ गया था. उसी से थोड़ा ऊपर सेना चौकी के बाद एक छोटी बस्ती उन लोगो की जो लड़ाई के बाद भारत में ही रह गए. वाहा जाने की इजाज़त हर किसीको तो नहीं है जैसा कि आर्मी जवान ने मुझे बताया पर महाराष्ट्र की गाडी होने का मुझे थोड़ा फायदा मिला और बस्ती में जाने मिल गया.

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Hunderman Village

चेक पोस्ट के थोड़ा आगे पोहोचते ही एक कार को टेककर रास्ते के किनारे दो लोग बैठे हुए दिखे. एक कुछ ९० साल के बुजुर्ग और एक अंकल.मैंने गाडी रोकी पूछने के लिए की और आगे जा सकते है ना बड़े मुस्कुराते हुए उन्होंने जवाब दिया हा हा देख आओ आगे.देखने के लिए तो कुछ था नहीं पर कुछ अलग ख़ुशी मिल रही थी. कुछ बच्चे भी दौड़ते हुए आये मिलने के लिए तो और अच्छा लग रहा था. नाम के अलावा बात उन्होंने कुछ की नहीं. वापसी में वो दोनों वही बैठे थे गाडी काफी धीमी गति में थी तो आवाज़ देकर पूछ लिया देख आये बेटा, मैंने जवाब दिया हा अंकल. फिर थोड़ी पूछताछ आप कहा से आये हो अकेले आये हो वो भी स्कूटी पे जवाब दिए उनके सवालो के और फिर अगला सवाल चाय पिओगे बेटा, जवाब हा ही था. अंकल दौड़कर घर गए,घर थोड़ी उचाई पे था और  बस चाय ही नहीं तो साथ रोटी भी लेकर आये. मुझे बैठने के लिए एक पत्थर दिया और बस बैठ गए हम गप्पे मारने. सबसे पहले तो वो मुझे चाय के बारे में बताने लगे. नमकीन चाय पीते है हम यहाँ .ठण्ड में ये चाय काफी मदद करती है और एसिडिटी की प्रॉब्लम भी नहीं करती और भी अलग अलग फायदे.  रंग देखकर ही मुझे कुछ अजीब सा लग रहा था पर पीनी तो थी ही.जैसे  ही एक घुट पि आगे पिने की इच्छा ख़तम  सी हो गयी थी पर वो मुमकिन नहीं था की किसीका दिल तोडा जाये. होटल होता तो चाय वही छोड़कर चली जाती पर यहाँ तो मेहमाननवाज़ी थी. चाय के साथ वो रोटी खाने के लिए भी बोलने लगे कुछ खाया नहीं होगा आपने , भूक लगी होगी आपको,दूर से सफर करके आ रहे हो , थोड़ी खा लो पर वो मुमकिन नहीं था, हाथो में पेट्रोल लगा हुआ था.जब तक मैं चाय पीती एक और अंकल आ गए और उनके साथ उनका बेटा. अब हम ३ से ५ हो गए थे .वो अंकल के भी वही सवाल अकेले आये हो इतनी दूर से वो भी स्कूटी से. जब सारे जवाब हा में मिले तो वो कहते है आप पढ़े लिखे हो ना बेटा  इसलिए ये हिम्मत कर पाए हमारी बच्चिया तो नहीं कर पायेगी. कारगिल से ऊपर आने में ही डर जाती है.

पढ़ने के काफी फायदे होते है हम तो नहीं पढ़ पाए.स्कूल आधे समय बंद रहती थी हमारी और आधे समय टीचर नहीं, छोड़ दी हमने पढाई. अब बनी है थोड़ी अच्छी स्कूल,8th क्लास तक है पर, टीचर कभी आते है कभी नहीं.उनकी बातो के साथ चाय धीरे धीरे चल रही थी फिर भी आधी ही हो पायी थी और ये मुझे पता था अगर ऐसे एक एक घुट लेकर चाय पि गयी तो आज ना ख़तम होनी. तो उठाया गिलास और पि ली एक साथ. चाय पीकर कैसा लगा बोहोत गन्दा क्योंकि इसके पहले कभी नहीं पि थी. सच कहा जाये तो अगर मैं किसी और जगह बैठी होती तो उलटी कर देती पर याहा मेरे दिल, दिमाग, तन, मन का भी शुक्रिया की जिस प्यार से एक अनजान के लिए वो चाय और रोटी लाये थे उस प्यार की लाज रख ली. अगर वो उस समय एक और गिलास चाय लाकर रख देते तो शायद उनके मुस्कुराते चेहरे के लिए वो भी पि जाती.चाय ख़तम हुई पर हमारी बाते नहीं भारत पाकिस्तान के किस्से, यादे.गाँव में रहकर जो वो काम करते है उसकी बाते,छोटे छोटे खेत और ज़िन्दगी. बाते और भी होती पर अँधेरा होने से पेह्ले गेस्ट हाउस पोहोचना था. तो अलविदा कहकर निकल पड़ी उनकी दुवाओ  और कुछ सवाल के साथ.जो सबसे बड़ा सवाल मन में आया, वो ये  की कुछ लोग है जो चाह कर भी पढ़ नहीं पा रहे और कुछ हम जैसे खुदको एडुकेटेड कहने वाले लोग क्या इसका सही इस्तेमाल कर रहे है. क्या इसकी एहमियत समझ पा रहे है. क्या ये समझ पा रहे है की कितने खुशनसीब है हम. जवाब मिलना बाकी है,जवाब कब मिलेंगे वो   तो  नही पता पर सवाल जहा से आये वोह लम्हा हमेशा एक मीठी याद बनकर साथ रहेगा.

सुचना  चाय बुरी इसलिए नहीं लगी की बुरी बानी थी चाय बुरी इसलये लगी की कभी पहले पि ही नहीं थी

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Namkin Chai

The Magic Moment

Do I believe in magic?.Dint really  untill that moment,the striking moment which took away all my fears and made me believe “Yes I can do it”. Such moments come daily in our lives I feel but somehow we ignore it in our bhagti daudti tension wali daily life with so many different role to play and thats why I travel,to experience and appreciate the beauty of life. And one such experience I got in the very less known place Bhaisaghat.Very few of you must have heard about this place.Its on Jabalpur Damoh State Highway,bifurcating from the small town of Singrampur, if travelling by own vehicle by this route one will never regret a short detour to the beauty which Bhaisaghat holds.The excellent road with greenery on both sides and the mountain range full of twist and turns is beautiful.Instead of me describing the place let this photos do some talking (Visuals are always more effective)IMAG1024

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So I reach to Bhaisaghat crossing this impressive road and reach the 1st tourist point Nidan Waterfall check point where you need to buy a entry ticket. Sounds easy and simple way to get in ohh wait not for a single girl,I prefer less crowded places but it has its problems and disadvanatges.So comes the point to handle the problem and to start conversation with two guards at check point

Me-Uncle Nidan Waterfall

Guards- Yehi hai,kaha jana hai apko

Me-Uncle fall dekhne

Guards- kitne log hai aapke sath

Me-Akeli

Guards-madam fir toh nahi jane de sakte aapko

Me-uncle kyu

Guards- akele permission hi nahi hai upar se aap ladki ho kuch ho gaya toh hamari jawabdari ho jayegi,naukri chali jayegi

Me-Uncle kuch nahi hoga main dhyan rakhungi,Nagpur se,itni dur se akele aayi hu bas ye fall dekhne bina dekhe kaise jau

Guards : with the surprise look,akele aye ho aap is gadi pe.Par nahi jane de sakte hum aapko abhi abhi kuch ladke gaye hai niche pani me pata nahi kaise honge pike honge,hum nahi jane de sakte

Me- (No offence boys,but sometimes you really are a problem :p) some more convincing,uncle waste ho jayega itna dur aana please bas thode der ke liye,kuch nahi hoga main dhyan rakhungi aapki naukri nahi jayegi

Guards :Discussion time between them  and finally- ok hum aapko jane denge par bas pas me ek viewpoint hai jaha se fall dikhta hai wahi tak aap niche pani me nahi jaoge aur bas 15 min ,15 mins me aap nahi aaye toh hume aapko dhndte huye aana padega.

And one guard came to drop me to that place.

IMG_9031                                         Waterfall from the view point

Desperately wanted to go down from to the point from where water was coming but had promised to get back in 15 min.So time to go back,no not really :).I was just about to start my bike and the magic moment happened I saw a traveller bus stopping at the view point and to my surprise 12 Nuns age group between 82 to 25 got down from the traveller. I was astonished,happy,excited (Your wish is my command moment).I knew this is my chance to go down with them,sit near the water and enjoy the beauty .

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That was the moment when I realised there is some energy watching you,listening you,protecting you earlier also there were moments when my wish got fulfilled but the energy which I was introduced to by nature at that moment was different it felt like someone is saying you follow your dream I am there with you,keep your fears aside just believe in yourself.Even today when I go riding on Highways all alone this energy keeps me going not letting me get scared.I guess this also answers the most important question everyone ask “Dont you feel scared”

Time to move to the 2nd point Nazara view point and again to my surprise when I got back to check point and asked for this point eventhough this place was more secluded and in interior than waterfall they allowed me saying “jaiye madam dekh aaiye aap nahi daroge bas kahi dikkat lage toh laut aana aur mera no rakh lo jarurat pade toh call kar lena” 🙂

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This was My Magic Moment.How about you?Whats yours or are you still ignoring it in daily chaos.

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