कालू


इनसे मिलिए ये है कालू. कालू से हम मिले कळसूबाई पीक  की नाईट ट्रेक पर कळसूबाई बोले तो महाराष्ट्र का एवेरेस्ट. हम हमारे गाइड के साथ निकले पीक के लिए और ये जनाब हमारे पीछे पीछे, थे ये गाइड के पेहचान वाले ही. 15 min ही हुए थे हमे शुरुवात किये हुए की गाइड को याद आया वो अपना फ़ोन शायद गाओं में ही भूल गए है. हमने कहा उनसे आप जाइये आपका फ़ोन लेकर आइये हम यही रुकते है. गाइड तो चले गए हमे लगा था कालू जनाब भी चले जायेंगे, पर नहीं ये बैठे रहे हमारे साथ हमारे बाजू में ही जब तक गाइड आये नहीं. गाइड आने के बाद शुरू की हमने फिर आगे की चढाई और कालू जी हमारे साथ साथ. हमे तो हिम्मत क्या ही देते ये खुद ही इतने डरपोक की थोड़ी भी आवाज़ हुई नहीं की हमारे पैरो के पास आ जाते. कालू ने तो कई बार हमे ही आजु बाजु छान बिन करने को मजबूर कर दिया था की कही कोई है तो नहीं. था कोई नहीं ये युही होशियार बने जा रहे थे. कुछ सुबह 3 बजे हम कळसूबाई टॉप से कुछ 10 min पेहले कुछ हॉटेल्स जाहा रात को रुका जा सकता है वहा पोहोचे. वाहा हमारे गाइड का भी एक होटल था जहा उन्होंने हमारे सोने का इंतज़ाम कर दिया. सुबह कुछ 6 बजे हम टॉप पर जाने के लिए निकले , इस बार गाइड साथ नहीं आने वाले थे क्युकी उन्हें नाश्ते चाय की तैयारी करनी थी ट्रेक के लिए आये और आने वाले बाकि लोगो के लिए भी. Saturday Sunday होने की वजह से काफी लोग ट्रेक के लिए आते है  तब  ऑफ सीजन में भी बिज़नेस इनका अच्छा  हो  जाता है. गाइड नहीं भी साथ आये तो भी कालू जनाब हमारे साथ साथ कळसूबाई टॉप चढ़े, जब तक हम वाहा रुके ये भी हमारे साथ और निचे उतरना चालू किया तो  भी हमारे पीछे पीछे ही. ट्रेक के लिए आये हुए एक ग्रुप के किसी मेमबर ने कमेंट भी किया ये आपके साथ साथ  आया है,हर किसीके साथ आते नहीं ये.

घर पर  कोई पालतू जानवर कभी रहा नहीं तो लोग जो इतना कहते है  कुत्ते आपके सबसे अच्छे दोस्त होते है, निष्ठावान होते है ये सब कभी महसूस करने मिला ही नहीं. फिर कालू से मिलकर समझा की लोग जो भी केहते है सच्च ही है. हमने तो कालू को एक बिस्किट भी नहीं खिलाया था,फिर भी वो हमारे साथ रहा. हर ट्रिप में अलग अलग लोगो से रिश्ते बनाये, वो रिश्ते बने उन लोगो से बात करके कुछ अपने बारे में बताकर कुछ उनके बारे में जानकार और फिर इस ट्रिप में बना ये एक अनोखा रिश्ता सारे रिश्तो से अलग, जहा ना कुछ बताने की जरुरत पड़ी ना कुछ जान ने की. उम्मीद है जब कभी अगली बार कळसूबाई गयी कालू इसी तरह हमारे साथ चलेगा.

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Kaalu
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One comment

  1. Although the fact tht kalu was a four legged friend was rather obvious from the 2nd line of ur writeup… it sure was an engrossing read as always.
    N trust me when i say dogs do have a mind and attitude of their own. They sense stuff which we need explaination to understand.
    Three cheer to kalu n our very own maharastrian everestier!!!!

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