जिद्द हिम्मत और दुआ


पटनीटॉप से सोनमर्ग की राइड के बाद अब समय था आराम का. सोनमर्ग मार्केट प्लेस में रहने के कई विकल्प मौजूद है. सोनमर्ग मार्केट प्लेस में पहुँचते ही आपके बाए और देखने मिलेंगे होटल्स, रेस्तरां और दुकाने और दाहिनी ओर GOVT रेस्ट हाउस, GOVT द्वारा संचालित कुछ दुकाने, बैंक और एटीएम.मैंने होटल्स की लाइन में से एक होटल में अपने लिए कमरा सुरक्षित किया. कमरा बहुत ही छोटा सा, डबल बेड के बाद बस चलने भर की जगह बाकी रही, पर रूम के बहार के मंज़र की बात की जाए तो कवी को कविता मिल जाये और चित्रकार को चित्र. जैसे ही कमरे की खिड़की खुली सामने थे पहाड़ जो अँधेरे से ढके जा चुके थे,हरा भरा मैदान, मैदान में कुछ तम्बू, लकड़ियों पर हलकी से जलती आग और भूरे रंग के घोड़े. थोड़ा आराम और फ्रेश होने के बाद अब समय था पेट पूजा और कुछ जरुरी सामान लेने का.

होटल से निकलते ही बिल्कुल बगल में ही दिखाई दी ऊनि कपड़ो की दूकान.पर्यटक स्थलों पर आम तौर पर ये धारणा होती है की खरीदारी थोड़ी महंगी होगी, पर सोनमर्ग में उच्च दर्जे के ऊनि कपडे मिल जाते है बिल्कुल वाजिब दाम में. दस्ताने, मोज़े, टोपी खरीदने के बाद पता करना था मुझे मैकेनिक के बारे में. मार्केट के आखरी छोर में एक दूकान पर पूछा तो पता चला अभी तो कोई नहीं मिलेगा आप सुबह पता कर लीजियेगा, अगर कोई मोपेड के जानकार हो तो. वेगो मुझे श्रीनगर में ही दिखाने की इच्छा थी पर क्युकी इतना समय मेरे पास था नहीं तो आगे निकल आयी. खाना खाने मैं पैदल ही निकली पर जब दूकान में मोपेड का जिक्र निकला तो दूकान में बैठे भैया की भी उत्सुकता बढ़ गयी. वेगो से आयी हु, अकेली आयी हु,लद्दाख जाना है सब जानकर वो थोड़ा हैरान भी हुए और खुश भी “यहाँ तो बाइकर्स आते रहते है पर मोपेड से इतनी दूर अकेले हमने नहीं देखा किसीको“. मैकेनिक तो अगली सुबह मिलना था अब बस खाना बाकि था. उनसे अच्छे होटल के बारे में पूछा तो वह अपने ही होटल ले गए जो दूकान के बिलकुल बाजू में था, रहने का इंतज़ाम भी था वहा उन्होंने उसके लिए भी पूछा पर मेरा रूम मैं पहले ही बुक कर चुकी थी. खाने में उन्होंने मुझे कश्मीरी स्पेशल वाज़वान खिलाया. खाते खाते बातचीत का सिलसिला जारी था और तभी मेरे मन में थोड़ा डर और थोड़ी उत्सुकता बनाये जो सवाल था मैंने पूछ लिया “कैसा है ज़ोजि ला,मोपेड जा पायेगी मेरी वहा. बहुत मुश्किल होगा क्या?“. ज़ोजि ला के बारे में मैंने बस सुन रखा था और कुछ अच्छा तो नहीं ही सुना था. पटनीटॉप में जब विशाल से मिली थी तब उसने भी अपनी चिंता जाहिर की थी “कैसे करेगी तू  ज़ोजि ला वेगो से, अच्छी अच्छी गाड़िया फेल होती है, इसका तो टार्क भी कम है “.ऐसा ही कुछ सभी ने कहा था इसलिए फोटो देखने की हिम्मत नहीं हुई. लग रहा था अभी पता नहीं तो ही चिंता खाये जा रही है फोटो में अगर देख लू तो कही आत्मविश्वास पे डर हावी ना हो जाए.

खतरनाक रास्तो में से एक है ज़ोजि ला और लद्दाख के लिए प्रवेश द्वार. लद्दाख की असली चढाई भी शुरू यही से होती है. होटल में सवाल पूछने का एक कारन ये भी था की जो मैं सुन ना चाहती हु वो मन को तसल्ली और हिम्मत देने वाला जवाब मिल जाये और वही हुआ भी ” मैडम आप इतनी दूर आयी है तो इंशाल्लाह आगे भी जरूर जाएँगी, आप कर लोगे ज़ोजि ला पार डरिये मत, हमारा तो रोज़ का आना जाना है यकीन मानिये कुछ नहीं होगा“. खाना ख़तम कर मैं दुआओ के साथ रूम पर लौटी. दिमाग तो अटका हुआ था ज़ोजि ला पर और किस्मत से बीएसएनएल चालू था तो अपने मेंटर को आखिर मैसेज कर ही दिया , ज़ोजि ला क्यों इतना मुश्किल माना जाता है?. जवाब में एक फोटो आयी, वो फोटो डाउनलोड करने से खुदको रोका और सोने चली गयी पर ” मनचला मन चला तेरी ओर” ओर फोटो देख ही ली, देखकर भी उस पार तो जाना ही था पर अब डर अच्छे से मन में घर कर गया था.दिमाग दिल की अपनी अलग लड़ाई शुरू हो चुकी थी ओर इस लड़ाई में नींद कब आयी समझा ही नहीं.

29th June 2016- सुबह कुछ आराम से ही हुई. उठते ही पहले खिड़की के बहार का नज़ारा देखा सुबह की हलकी धुप उजाले में साफ़ दीखते हरे भरे पहाड़, हरा भरा मैदान ओर मैदान में घोड़े.३ दिन से लगातार वेगो चलाने के बाद आज सोनमर्ग में ही रुकने का फैसला किया था .तैयार होकर पहला काम किया मैकेनिक के पास वेगो ले जाने का. मार्केट के आखरी छोर पर ही थी उनकी दुकाने. जब पहले मैकेनिक के पास गयी तो जवाब आया “बेटा मोपेड की तो जानकारी कुछ कम ही है यहाँ बस ट्रक का काम करना ही जानते है”. मुझे निराशा हो उसके पहले वहा खड़े ट्रक ड्राइवर अंकल बोल पड़े बेटा उस दूसरी दुकान में देख लो उसे थोड़ी जानकारी है इन गाड़ियों की. नाम लेकर उस दूसरे मैकेनिक को आवाज़ दी ओर मुझे वहा जाने के लिए कह दिया. मैकेनिक वहा किसी काम में व्यस्त थे पर फिर एक और ट्रक ड्राइवर अंकल ने उन्हें पहले मेरा काम करने के लिए कहा. मैकेनिक को मैंने बताया ज़ोजि ला जाना है इस गाडी से, आप देखिये कोई परेशानी तो नहीं होगी, जाएगी क्या ये ज़ोजि ला.वो वेगो स्टार्ट कर उसे थोड़ा घुमा कर वापस आये ” क्यों नहीं जाएगी बिलकुल जाएगी ये गाडी  बिल्कुल ठीक है“. आस पास काफी ट्रक ड्राइवर्स थे उनमे से भी किसीने कहा ” बेटा आराम से जा, हिम्मत ऐ मर्दा तो मदद ऐ खुदा“. दिन मतलब अच्छा गुजरना था, मैकेनिक ट्रक ड्राइवर्स इन्होने बोल दिया अब क्या डरना था. अब पेट्रोल का इंतज़ाम करना था, दूकान से कैन लेकर मैं पोहोची १३ कम दूर श्रीनगर हाईवे पर पेट्रोल पंप. वह ख़तम कर होटल रूम भी बदला शाम को मेरे दो दोस्त जो आने वाले थे. सब काम ख़तम कर अब समय था सोनमर्ग की वादियों को जीने का.

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वेगो लेकर मैं बढ़ी थाजीवास ग्लेशियर की तरफ, ३ कम की राइड फिर आपको ले चलती है खुशनुमा वादिया, खुला आसमान और आपको मोहब्बत से भर देने वाले नज़ारो में . पर बदकिस्मती देखिये की खूबसूरती के बिच भी नफरत आखिर जगह बना ही रही है.

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राइड करके मैं पहुंची जहा से शुरुआत होती है glaciers के तरफ चढाई की. वही कुछ छोटी चाय की दुकाने है पार्किंग और गाइड और घोड़े किराये पर ले सकते है. घोड़ो के लिए अलग से पगडण्डी बनी हुयी है पर अगर आप खुद चलकर जाना चाहा रहे है तो वो मैदान, वो वादी पूरी आपकी. और जब आप सफ़ेद पानी की बहती धारा में अपने पैर डालकर बैठ सकते हो ,उसकी ठंडक महसूस कर सकते हो, ठंडी बहती हवा को फुर्सत में अपने गालो को चूमने दे सकते हो,नंगे पैरो से जन्नत महसूस कर सकते हो, जब मन चाहे बर्फ से ढके पहाड़ और जब मन चाहे पलटकर दूसरी और हरी भरी घाटियों में बहता पानी, छोटे छोटे घर, दुकाने देख सकते हो तो क्यों भला घोड़ी चढ़ी जाए और बेज़ुबान जानवर को सताया जाए. मैंने फैसला किया पैदल चलने का और साथ ही हो लिया मेरे साथ एक १८ साल का बच्चा,उम्र जैसी उसने बताई थी हो सकता है कम ही हो, स्लेड्जिंग बोर्ड साथ लेकर मुझे मनाते हुए की दीदी ज्यादा पैसे नहीं लूंगा आप ही देख लो कितना दूर है. आपको स्लेड्जिंग भी करवा दूंगा मैं खुद ही . हां मैंने कहा नहीं था पर साथ साथ हम पोहोच गए स्लेड्जिंग पॉइंट.

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स्लेड्जिंग करने में तो मुझे दिलचस्पी नहीं आयी पर बर्फीले पहाड़ की चोटी तक पहुंचने की इच्छा जाग उठी. बच्चे का नाम तो मुझे याद नहीं पर उसने मुझे गम बूट्स दिलवाये, स्लेड्जिंग बोर्ड कही छुपा कर रख दिया और हो लिया मेरे साथ “दीदी पर मैं ज्यादा दूर तक नहीं आऊंगा बस आधे रस्ते वहा से आप चली जाना,मेरा दिन वरना पूरा आप ही के साथ चला जायेगा“. तो चल पड़े हम साथ साथ, आधे रस्ते जहा तक तय हुआ था वो मेरे साथ आया फिर रुक गया “दीदी अब आप ही जाओ आगे”.

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पहाड़ में पूरी बर्फ, कुछ छोटे छोटे पत्थर और बर्फ पिघलकर बहता हुआ पानी. कुछ कुछ जगह ऐसी की कही बर्फ पिघलकर आपका पैर अंदर ना चला जाए . अभी तक तो वो बच्चा साथ में था बहुत बार फिसलते फिसलते मुझे बचाया ,गिरी तो मुझे उठाया ,पैर कहा रखना है ये बताया पर आगे मुझे खुद ही खुदको संभालना था. थोड़ी ही दूर मैं अकेले पहुंची थी की पीछे से आवाज़ आ गयी “अरे दीदी कहा जा रहे हो,गलत जा रहे हो आप,रुको मैं आता हु, आप वाहा चले जाते तो कुत्ते खा जाते आपको,पहाड़ी कुत्ते है ये उनके आस पास भी जाने का मत सोचिये“. पहाड़ी कुत्ते जो रखे जाते है भेड़ की रखवाली के लिए और वह अपना काम पूरी निष्ठा से करते है, मजाल किसीकी की उनके रहते भेड़ को हाथ लगा ले. अरे पर तुम तो वापस जाने वाले थे, “कैसे चले जाता आपको छोड़कर, मेहमान हो आप हमारे आपको कुछ हो जाता तो क्या जवाब देते हम कश्मीर वाले”. और कुछ यु हमारी दोस्ती हुयी. फिर बाते आगे बढ़ी ,परिवार में कौन कौन है और क्या काम करते हो ” इस पर घर की सारी जिम्मेदारी थी सोनमर्ग में गाइड के अलावा अमरनाथ यात्रियों के लिए भी गाइड की सेवा देता था,बेहेन थी एक छोटी जो स्कूल में थी.

“तुम थके नहीं रोज़ा होगा ना तुम्हारा “

“नहीं मैं नहीं थका अल्लाह हिम्मत देता है”

हर कोई यहाँ रोज़ा नहीं करता क्या मार्केट में मैंने देखा कुछ लोग तो खाना खा रहे थे?

“हा तभी तो क़यामत आती है ना, देखा नहीं आपने २०१४ में जो बाढ़ आयी थी, अल्लाह सब देख रहा है”.

“अच्छा ये जो जगह है ना यही बजरंगी भाईजान के शूटिंग हुई थी जो सलमान खान को गोली लग जाती है वही वाला”.

मुझे बताओ तुम भारत में रहना पसंद करोगे या पकिस्तान?

“दीदी मुझे क्या पता पाकिस्तान, ये कुछ ३ % लोग है जो कश्मीर बेच आये है,नफरत फैला रहे है”

बातो बातो में काफी ऊपर चढ़ चुके थे हम,”दीदी आप पहले गेस्ट हो अभी तक के जो इतना ऊपर चढ़ के आये हो वरना कोई आना पसंद नहीं करता“. चोटी तक तो हम नहीं पहुंच पाए क्युकी शाम के पहले निचे भी उतरना था और उसे घर पे सामान देने भी जाना था. अपने आप में ही एक अलग दुनिया में आये जैसा लग रहा था उन पहाड़ो के बिच. निचे उतरते उतरते नदी के किनारे बानी चाय की दूकान पर कावा और मैगी का मज़ा लिया, पहली ही बार ही कावा का स्वाद चका था मैंने. मुझे वेगो के पास छोड़ वो तुरंत भागा घर की और सामान खरीदने के लिए.

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इस बार जो मैंने होटल बुक किया था वो मार्केट से काफी पहले ही था पर किसी कारन से मैं फिर मार्केट के लिए निकली. मार्केट में कल रात वाली दूकान पर जा ही थी की अचानक से आवाज़ आयी “The Wego Girl”. अनजान शहर में आपको कोई इस नाम से बुलाये तो चेहरे पर मुस्कान आना लाजमी ही था. तब तो मुस्कुराकर मैं दूकान के लिए आगे निकल गयी पर लौट ते वक़्त उनसे मिली. होटल वाली लाइन में ही एक होटल के बहार कुछ ३० ३१ उम्र के एक नौजवान और २ बुजुर्ग अंकल बैठे थे. होटल उन्ही का था. उन्होंने मुझे चाय के लिए पूछा और चाय के लिए तो मना हम करते ही नहीं. चाय और बिस्कुट मंगवाई गयी मेरे लिए.एक अंकल ने बातो का सिलसिला आगे बढ़ाया बेटा कहा से आये हो कौन है साथ में उन्हें जवाब दिए, थोड़ा वो चौके फिर बोले-

आप नागपुर से अकेले आये हो, बड़ी हिम्मत की है बेटा आपने , मेरी बेटी के उम्र के ही हो आप वो श्रीनगर में पढ़ती है, वो श्रीनगर से सोनमर्ग आने की भी हिम्मत नहीं कर पाती, कहा तक जाओगे आप “. बताया मैंने और फिर उनसे अपना सवाल पूछ ही लिया

” जोज़ि ला में चल जाएगी ये गाडी”.

बेटा आपने यहाँ तक आने की हिम्मत की है इंशाल्लाह आगे भी आप जरूर जाओगे, मैं आपके लिए दुआ करूँगा, जब आप नागपुर पहुुँच जाओ तो कॉल जरूर करना “.

इतनी शिद्दत और खूबसूरती से बोला जाता है यहाँ “इंशाल्लाह”, हाय, दुआ काबुल ही हो गयी समझो.

उनके बेटे ने भी कहा मैं आज ही आया हु जोज़ि ला पार करके चले जाओगे आप बस थोड़ा आराम से रुकते रुकते जाना और ध्यान रखना. कोई परेशानी आयी अगर तो मदद के लिए लोग भी मिल जाएंगे या मुझे कॉल कर देना. इनके जवाब ही थे जो हिम्मत दे रहे थे. उन्होंने शाम को खाने का न्योता दिया.
आजकल जहा लोगो को प्यार से नफरत और नफरत से मोहब्बत होती जा रही है ऐसे में ऐसे लोगो का मिलना , जिंदगी को उमंग और उम्मीद से भर देता है. फैलती नफरत और खौफ के बिच भी मोहब्बत अपनी जगह ढूंढ ही लेती है.

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हामी भरकर मैं होटल वापस आ गयी अपने दोस्तों के इंतज़ार में. सोनमर्ग में जहा नज़र उठा के देख लेंगे वहा आपको बस खूबसूरती ही दिखेगी और इसलिए इस होटल से भी खूबसूरत पहाड़ दिल जीत रहे थे. दोस्त आये हमने बोहोत मस्ती भी की पर जैसे जैसे रात चढ़ रही थी वैसे वैसे बैचनी बढ़ रही थी.ये बैचनी ख़तम तब ही होनी थी जब अगली सुबह उठकर जोज़ि ला नाम का पहाड़ पार लगता. उसके लिए जरुरी थी रात की अच्छी नींद. अपनी बैचैनी को साथ लेकर और अपने कुछ करीबी लोगो को मुझे आगे के सफर के लिए शुभेछा देने का मैसेज डालकर चली मैं अपनी नींद पूरी करने कल के मुश्किल सफर के लिए.

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One comment

  1. I just realised something that i already knew yet hadnt acknowledged. You are a magnet to people and tea!!
    Both being available, chances are very bleak that you dont have a tete-a-tete!!!
    And herein lies your success…
    Im yet to come across an individual who hasnt come away in awe of you are an interaction…im still in awe of you!!!
    Reading.. n following!

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