मेलघाट के रंग


जब भी हम घूमने निकले है हमेशा जो सोचा उस से कुछ अलग देखने और अनुभव करने मिला है. इस अलग अनुभव का हमेशा कारण रहा है दिल खोलकर लोगो से बात करना. जितना हमने दिल खोलके बात की उतना ही उन्होंने हमें अपनाया.चाय पीते पीते बातो बातो में समझा हम भारत के पहले “Digital Village” में बैठे है.
“1 Rupee Doctor” पद्ममश्री डॉ रविन्द्र कोल्हे से मिलने के इरादे से पहुँचे थे गाव कोलूपुर जो कि महाराष्ट्र के धारणी जिल्हे में पड़ता है. डॉ कोल्हे तो नही मिले पर उनकी बहू से मुलाकात हुई और जान ने मिला कुछ अलग ही काम.

उसके बाद हम पहुचे लवादा जहाँ पर है “बांबू सम्पूर्ण केंद्र”. यहाँ आदिवासी समाज के लोगो की कला को और उभारने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्हें स्वयं पूर्ण बनाया जाता है और स्वयंरोज़गार के लिए भी तैयार किया जाता है.वहाँ मुलाकात हुई काफी अलग लोगो से. अलग उम्र,अलग अलग गांव, अलग सोच पर सबको बांधती एक कला.उसी जगह से पता चला गांव चित्रि का, 70 घर का वो गांव और उसकी अपनी अलग खासियत.

और साथ ही मज़ा लिया हमने सेमाडोह जंगल, मेलघाट में छोटी सी ट्रेक और वहाँ के खास कोरकू तरीके से बनी चिकन करी का. कोरकू मेलघाट में बसे आदिवासी समाज मे से एक जाती है.
ये सारी कहानी और कुछ बाते लेकर आये है हम अपने चिखलदरा मेलघाट के दूसरे एपिसोड में.

लिंक पर क्लिक करके देख सकते है आप पूरा एपिसोड. एपिसोड पसंद आये तो चैनल सब्सक्राइब करके हमारा उत्साह बढाना ना भूले और ना पसंद आये या आगे एपिसोड्स में आप कुछ सुधार चाहते है तो वो भी आप यहाँ कमेंट बॉक्स पर बता सकते है.😊

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