Toilet A Basic Need

प्रिय प्रधानसेवक,

राखी पर आपने देशवासियों को रक्षाबंधन पर बधाई देते हुए अलग अलग उम्र की लड़कियों से राखि बंधवाकर रक्षाबंधन मनाया.कुछ लड़कियों ने आपके के लिए खुद राखी भी बनाई .शायद उन्हें कही विश्वास होगा की आप उनकी रक्षा करेंगे, कुछ नए कानून लाएंगे,उन्हें नई उम्मीद देंगे. उन मासूम बच्चियों को शायद बड़ा सुरक्षित लग रहा होगा, लग रहा होगा वो डर पर नही तो बस अपने सपनो पर ध्यान दे सकती है.

काश की ऐसा ही विश्वास 25 साल की उस लड़की को होता जिसका वेस्टर्न कोल फील्ड के कच्चे बाथरूम में जिसे बाथरूम कहना भी लाजमी नही होगा गैंगरेप हुआ. 25 साल की वो लड़की, वेस्टर्न कोल फील्ड के वजन विभाग में काम करती थी. वेस्टर्न कोल फील्ड जो की एक बड़ा नाम है. जहाँ काम करना कई लोगो का सपना भी होगा, ऐसे बड़े नाम के एक विभाग में काम करने वाली वो लडक़ी. हर सुबह की तरह 14 Aug को भी वो घर से काम के लिए निकली. शायद कुछ सपने लेकर निकली या शायद कोई खुशी या शायद कोई टेंशन या कोई दुख पर जो उस दिन उसके साथ हुआ वो सोचकर तो जरूर नही निकली होगी.

आप भ्रूण हत्या कम करने की बात करते है पर उस हत्या का क्या जो बड़ी बेदर्दी से लड़की के बदन को नोचकर की जाती है.जिस लड़की की कहानी मैं बता रही हु वो आज नागपुर के एक अस्पताल में अपनी जिंदगी के लिए लड़ रही है. पहले तो उस लडक़ी का सामूहिक बलात्कार हुआ फिर स्क्रूड्राइवर से उसकी आंखे फोड़ी गयी और उसे पत्थर से इतना मारा की जबड़ा पूरी तरीके से टूटा है और लड़की बोल नही पा रही है. मजे की बात देखिए जब आप लाल किले पर चढ़कर आपने लड़कियों की ये फौज बनाई, लड़कियों के लिए ये किया वो किया इसका बखान कर रहे थे,जब आप बता रहे थे की सुप्रीम कोर्ट में 3 महिला जज आयुक्त हुई, उसके बस एक ही दिन पहले हुआ और वो भी भरी दोपहरी को हुआ.

आप सोच रहे होंगे की ये सब मुझे क्यों बताया जा रहा है. आप हमारे प्रधान सेवक है ये एक कारण तो है ही पर दूसरा कारण ये भी है की देश की परेशानियों पर हमने आपको भावुक होते देखा है. काले धन पर आपका वो भावुक भाषण हमने सुना है, #SelfieWithDaughter को आपका वो समर्थन देखा है जिसमे आपने कहा था गर्व से अपनी बेटी के साथ अपनी फ़ोटो शेयर करो और दुनिया को बताओ. आपने औरतों से अपील की थी जिस घर में टॉयलेट ना हो वहाँ औरते रक्षाबंधन और त्योहार ना मनाए,शादी ना करे पर यही टॉयलेट हमारे ऑफिस हमारे कॉलेज में ना हो तो हम क्या करे. क्या लड़किया,औरते घर के बाहर निकलना छोड़ दे. सुप्रीम कोर्ट में 3 औरते जज होने की खुशी बहुत है पर औरतो की बुनियादी जरूरतों को ऑफिस,स्कूल,कॉलेज में नज़रअंदाज़ करने का दुख खुशी से दुगुना है.

ये तथ्य बिल्कुल किसी से छुपा हुआ नही है की लड़किया जज,पायलट,डॉक्टर,अफसर बन ने के सपने देखे उस से पहले ही टॉयलेट नही है एक इस कारण से भी स्कूल छोड़ देती है. कैसे छेड़ छाड़ भी ज्यादा होती है. उमरेड की घटना भी उसी तथ्य को साबित करती है. वेस्टर्न कोल फील्ड पूरी तरह से असमर्थ रहा महिला कर्मचारियों की बुनियादी जरूरत को पूरा करने में. महिला कर्मचारी को मज़बूरन एक ऐसा टॉयलेट इस्तेमाल करना पड़ रहा था जो ऑफिस से 400 mtr तो दूर था ही और बस कुछ लकड़ियों और कपड़ो से बना था. जिसका पूरा पूरा फायदा आरोपियों ने उठाया. ये कहानी बस वेस्टर्न कोल फील्ड की नही तो भारत के कई नामी गिरामी दफ्तर,स्कूल, कॉलेजेस की है.

निर्भया के समय हमने आपके वो सवाल देखे है. हमने आपकी वो अपील सुनी थी जिसमे आपने कहा था “वोट देते समय निर्भया को मत भूलना”. तब हम निर्भया को नही भूले और आगे के वोट में हम उमरेड रेप केस नही भूलना चाहते. हम ये नही भूलना चाहेंगे की कैसे हमारे प्रधान सेवक ने उस केस पर कारवाई करवाई, कैसे बिना लोगो के सड़को पर उतरे उन्होंने उसे न्याय दिलाया,कैसे हमारी उम्मीद पर वो खरे उतरे, कैसे उन्होंने टॉयलेट में हुए एक रेप केस की वजह से रातो रात ये फरमान निकाला हर स्कूल,हर कॉलेज,हर दफ्तर में महिलाओं के लिए सुरक्षित साफ सुथरे टॉयलेट होंगे, कैसे उन्होंने महिलाओं के सम्मान को उच्च दर्जा दिया और हर लडक़ी हर महिला का भविष्य सुरक्षित रहेगा ये विश्वास दिलाया.

Advertisements

मेरा रंग नही मेरी पहचान

#YeNahiIndiakaNayaChehra

बोरोप्लस के विज्ञापन की एक तरफ जहाँ शुरुआत होती है “ये है इंडिया का नया चेहरा” वही इसका अंत होता है “सांवलापन हटाये” पर. विज्ञापन में दिखाई गयी एक लड़की fighter pilot दिखाई गई है तो दूसरी biker. ना तो पायलट बन ने के लिए गोरापन मापदंड होता है ना बाइकर बन ने के लिए. मैं खुद एक राइडर हु, राइडर की पहचान मुझे मेरे रंग से नही मेरे राइडिंग के जुनून से मिली. फिर आप ये कौनसा इंडिया का नया चेहरा बता रहे है…..

मेरा रंग नही मेरी पहचान.

#YeNahiIndiakaNayaChehra ये हैशटैग चलाकर इस मानसिकता का विरोध होना चाहिए