Nostalgia

बस यादें, यादें, यादें रह जाती है
कुछ छोटी, छोटी बाते रह जाती है,बस यादें….

आज 16 साल बाद मौका आया मेरी स्कूल “Mennonite English Senior Secondary School,Dhamtari” जाकर देखने का और यादों को जीने का.इस स्कूल में मैंने 4th से 9th तक की पढ़ाई की थी फिर पापा के ट्रांसफर की वजह से नागपुर आ गयी. आज जाना हमे जगदलपुर तरफ था और उसके विपरीत दिशा में था धमतरी,बस 9 km. राइड पर होने की वजह से 9 km कुछ भी नही था और कुछ पुराने लम्हो की एहमियत भी थी.16 साल बाद स्कूल में काफी कुछ बदला और काफि कुछ नही भी.

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अपनी वो क्लास देखी,वो स्टेज देखा जहाँ उस स्कूल का मेरा पहला डांस परफॉर्मेंस किया था और सबसे जरूरी मिली अपनी 16 साल पुरानी दोस्त क्रिस्टीना से. फेसबुक पर बस हम नाम के दोस्त है ना कभी कोई चैटिंग की, ना किसी की पोस्ट पर लाइक या कमेंट ना ही कभी फ़ोन पर बात. आज जब स्कूल गयी तो स्कूल बंद हो चुका था,हमारे जमाने में स्कूल 5 बजे तक हुआ करती थी तो उम्मीद थी खुली रहेगी पर पता चला अब स्कूल 12 बजे तक की हो गयी है.

इस दोस्त का मेरे पास नंबर नही था पर आज भी उसका घर कुछ कुछ याद था की स्कूल के आगे वाले चौक से लेफ्ट लेकर ही है किसी बिल्डिंग में घर है. बाकी मदद स्कूल के पिउन ने लैंडमार्क बताकर करदी क्योंकि वो वही जहाँ कभी वो पढ़ा करती है आज खुद टीचर है.

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इतने साल बाद जब मैं घर गयी किसी की तरफ से कोई फॉर्मेलिटी नही थी. बाते बस अपने आप होती चली गयी. Nikesh मेरे साथ थे पर उनके साथ भी बात करने में कोई हिचकिचाहट नही. क्रिस्टीना की मम्मी भाई भाभी सभी ने इतने अच्छे से घुल मिलकर बात की. भाभी से तो मैं पहली बार मिल रही थी पर लगा नही. कुछ हम यादों का पिटारा खोलकर फिर अपनी वो जिंदगी जी गए कुछ मिनटों में और कुछ आज की जिंदगी से जुड़े.

बाकी कहानी और भी है पर वो सुन ने मिलेगी आपको बहुत जल्द हमारे चैनल रास्ता सफर और ज़िन्दगी में. कहानियां आप मिस नही करना चाहते है तो सब्सक्राइब करे..

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निष्ठा और मुस्कान

👇इनसे मिलिए ये है रामलाल जी.आप पूछेंगे ये कौन तो रामलाल जी हमे रोज़ हमारी शाखा में चाय लाकर देते है.हमारी शाखा से आस पास ही है इनकी दुकान. अब आप पूछेंगे तो इसमें खास क्या, तो खास है इनकी मुस्कान और इनकी निष्ठा.

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मार्केटिंग में होने की वजह से बैंक की अलग अलग शाखा में जाना होता है. आज जाना हुआ इतवारी शाखा में. सुबह 10.30 बजे ऑफिस जाते हुए तो कोई बारिश नही थी पर दोपहर को शुरू हुई जमके बारिश. बाहर बारिश हो तो सबसे पहले याद आती है चाय की और पकोड़ो की भी,अब पकोड़ो का ऑफिस में सोचो और मिल जाये थोड़ा मुश्किल है पर चाय, वो तो मिल ही सकती है. चाय का ख्याल मन मे आया ही था कि सामने थे रामलाल जी. मार्केटिंग में होने की वजह से काम घूमने का है मेरा पर बारिश में रेनकोट पहनकर बाहर जाना थोड़ा जान पर ही आता है. पर रामलाल जी बारिश में भी बढ़िया रेनकोट पहने, हाथ मे केतली लिए और कुछ कप लिए शाखा में आए. चेहरे पर कोई चीड़ चीड़ या बारिश में जो थोड़ी कीच कीच होती है वो भी नही बढ़िया मुस्कुराते हुए जिनको जिनको चाहिए वो चाय दे रहे थे.

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बड़ा ही मजा आ रहा था मुझे उनको देखकर एक तो दिख बढ़े क्यूट रहे थे वो उसपे ना उनकी मुस्कान बड़ी आकर्षित कर रही थी मुझे. मतलब भाई बारिश हो या कुछ मैं तो अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभाऊंगा. जो मेरा काम है वो करूँगा. अब आप बोलेंगे काम तो करेंगे ही पैसे कमाते है वो इसके. बात तो सही है पैसे कमाते है पर कितने ऐसे लोग है जो इस मुस्कान के साथ अपना काम करते है. मैं तो कितनी ही बार दिन भर में अपनी नौकरी को गालियां देती हूं जबकि मेरे सपने उसी से पूरे हो रहे है और हा पैसे भी बड़े अच्छे मिल जाते है. पर फिर भी किट किट कभी ये बोलकर “यार इतनी धूप में भी बाहर घूमना पड़ता है”, “यार मौसम कितना अच्छा है और मैं ऑफीस में बैठी हु”,”इस बारिश में कौन बाहर जाए”. रोज़ कोई नया बहाना ढूंढ ही लेती हूं और फिर मिलते है रामलाल जी जैसे लोग जो याद दिलाते है खुशी की,ईमानदारी की,निष्ठा की.

दोपहर के बाद से बारिश रुकी नही थी तो रामलाल जी शाम को फिर चाय देने आए फिर वही रेनकोट वही केतली और उसी मुस्कान के साथ. अच्छा लगता है जब दिनभर में कुछ ऐसे लोगो से मिल लेते है, इन्हें देखकर दिन बन गया मेरा.