कुछ वो लोग

कुछ वो लोग है
रूखी सुखी खाकर भी
बेफिक्रे बने
जीने में मदमस्त है

कुछ वो लोग है
सबकुछ पाकर भी
किसी खलती हुई कमी
को पूरा करने के ही
जदोजहद में है

कुछ वो लोग है
जिनकी रात की
जगह का ठिकाना नही होता
पर दिल मे सुकून
की कमी नही होती

कुछ वो लोग है
एक नही चार कमरों
में रहते है
पर सुकून के लिए
दर बदर
गली गली भटकते है

दोनो को जोड़ता है
जो शौक
वो नशा है
एक के नशे को
जहाँ इल्ज़ाम देते है
दूसरे के नशे
को शान का
नाम देते है.

-स्नेहल वानखेड़े

Advertisements

बरसात की वो रात

Life is what you make it.

कल बड़े दिनों बाद मैं अकेले राइड पर निकली. ऑपरेशन के बाद कई दिनों तक एवेंजर चलाने के लिए ही मना था, जब परमिशन मिली तब भी अकेले जाने की हिम्मत नही होती थी. थोड़ा डर लगता ही था अगर पैर पर कोई झटका आ गया तो, पर कल वो दिन आ ही गया जब एवेंजर लेकर अकेले निकल पड़ी.

अपनी मर्ज़ी से ज्यादा दिमाग का खराब होना बड़ा कारण था राइड पर जाने का. राइडिंग से बेहतर तरीका और कोई समझ नही आ रहा था शांत होने का. ऑफिस में जैसे तैसे मन मार कर समय निकाला,ऑफिस खत्म करके रात को करीब 8 बजे राइड पर निकली. कहाँ जाना है, कौनसा रास्ता लेना है,कहाँ रुकना है कुछ पता नही, बस यवतमाल शहर से जल्दी बाहर निकलना है और चलते जाना है इतना पता था. कही पहुचने की कोई जल्दी नही 40-60 की स्पीड में एवेंजर बढ़ रही थी और पहुँची यवतमाल नांदेड़ हाईवे पर.मौसम भी बडा सुहाना हो रखा था, बढ़िया ठंडी हवा गालो को छू रही थी.

Maker:0x4c,Date:2017-10-29,Ver:4,Lens:Kan03,Act:Lar01,E-Y

बढ़ते बढ़ते एक बार मन मे आया नांदेड़ पहुच जाऊ 150 km दिख रहा था.कभी लगा लातूर जो काफी दूर था और समय हो रहा था करीब रात 9.45 बजे का. सुहाने मौसम में फिर तड़का लगा बिजली का. तब अपने मन को ब्रेक लगाकर मैंने वापस अपने घर यवतमाल आने का फैसला लिया. बस अपना मोबाइल,पैसे और एक पानी की बोतल के साथ घर से निकली थी तो आगे का सफर करना उचित ना था.इसलिए गाड़ी पलटाई लौटने के लिए.

वापसी का सफर शुरू हुआ और उसी के साथ शुरू हुई जोरो की आंधी, गाड़ी संभालना मुश्किल हो रहा था ऊपर से नागपुर मुम्बई हाईवे का काम जिसमे हमने घाट और सालो पुराने पेड़ तोड़ दिए. हर जगह बोर्ड लगे थे Go Slow, मन मे सवाल आ रहा था इसपे अगर सरकार भी थोड़ा सोच लेती तो. मैं डेवलोपमेन्ट के खिलाफ नही हु,वो तो बहुत जरूरी है पर at what cost. इसका हर्जाना कही तो हमे ही भरना है.

खैर ये तो अलग मुद्दा हो गया वापिस आते है राइडिंग पर. आंधी जब शुरू हो गयी थी तब बारिश कहाँ पीछे रहने वाली थी. जम के शुरू हुई बारिश और यवतमाल के आस पास 3 4 दिन में जितनी बारिश हो रही थी उसमें से सबसे तेज़ कल. राइड करने की तकलीफ बढ़ रही थी बारिश आंधी और सामने से आने वाली गाड़ियों की लाइट सब परेशान कर रहे थे. मैं बस अब कही रुकने की जगह ढूंढ रही थी. 10 15 मीन बाद जब बारिश अच्छी बढ़ चुकी थी एक ढाबा दिखा.

Maker:0x4c,Date:2017-10-29,Ver:4,Lens:Kan03,Act:Lar01,E-Y

ढाबे पर जाकर गाड़ी रोक दी.2 कार और एक कोई दूसरी गाड़ी थी जो बारिश में समझ नही आ रही थी. ढाबे के बरामदे में पहुची तो एक फैमिली दिखी जो निकल रही थी,एक कार उनकी थी. थोड़ा चौककर ही देखा उन्होंने मुझे क्योंकि घड़ी करीब 10.30 का समय दिखा रही थी और ये अकेली लड़की भारी बारिश में अपनी एवेंजर से उतरकर हाथ मे हेलमेट लिए ढाबे के अंदर आ रही थी. पूछा उन्होंने कुछ नही. ढाबे के मालिक किशोर सायरे ने टिन के छत के नीचे की जगह पक्की छत में अंदर जाकर रुकने के लिए कहा. ढाबे पर अब बस ढाबे पर काम करने वाले लड़के, ढाबे के मालिक और 2 दूसरे लड़के जो यवतमाल से अपनी कार से सफर कर रहे थे.

अंदर जाकर मैं एक चेयर पर बैठ गयी. मेरी यहाँ ठंड से हालात खराब हो रही थी और अंदर कूलर चल रहा था. एक कूलर की आवाज़ और दूसरी तेज़ आवाज़ जनरेटर की. मैं आजू बाजू देखते हुए कान में इयरफोन डाले गाने सुन ने की कोशिश कर रही थी. थोड़ा awkward सा हो ही रहा था. पहली बार ही यू अकेले इतनी रात में ढाबे पर बैठी थी. तभी आवाज़ आयी किशोर सायरे की “मैडम पानी वगैरह मँगाउ क्या”. उतना सवाल काफी था उनका मेरे लिए कान से इयरफोन निकालकर बातचीत का सिलिसिला शुरू करने का. समय तो काटना था ही.

Maker:0x4c,Date:2017-10-29,Ver:4,Lens:Kan03,Act:Lar01,E-Y

“नही बोतल है मेरे पास पानी की” कहकर मैंने बात को आगे बढ़ाया, “आज बारिश कुछ ज्यादा ही है ना”. “हां बारिश 3 4 दिन से रोज़ ही हो रही है पर इतनी जोर से आज ही”. किशोर ने कुछ सवाल पूछे आप कहा से आ रहे हो? कहा जा रहे हो?. उन्हें मैंने यवतमाल का भी पूछा “यवतमाल में भी इतनी ही बारिश शुरू है क्या?”. यवतमाल उनके ढाबे से कुछ 36 km था. उनका जवाब आया “वहाँ का तो पता नही, रुकिए मैं फ़ोन करके पूछता हूं”. उन्होंने तुरंत फ़ोन लगाया और यवतमाल का हाल पूछा. वहाँ भी बारिश उतनी ही थी.

हमारी ये सारी बाते पीछे के टेबल पर बैठे लड़के सुन रहे थे. उनका खाना खत्म करके जब वो निकलने लगे तब उन्होंने भी बातचीत शुरू की “इतनी रात को अब अकेले आगे नही जाना चाहिए, कार चलाने में ही दिक्कत हो रही है बाइक कहा चला पाओगे. बाइक भी आखिर मशीन ही है कुछ खराबी हो गयी तो अकेले क्या करोगे.आप एक काम करो बाइक यहाँ लगाकर थोड़ा पीछे जाकर ही बस स्टॉप है वहाँ से बस ले लो”. 11 बज रहे थे ढाबे पे ही काम करने वाले एक लड़के ने उन्हें बोला “इतनी रात को अब उन्हें बस कहा मिलेगी”. सब अपनी अपनी चर्चा में लगे हुए थे और मैं बैठे बैठे बस बारिश के रुकने का इंतज़ार कर रही थी.

अब वो दोनों लड़के भी चले गए,ढाबे में बचे अब बस ढाबे के लोग और मैं. 11 बजे उनका ढाबा बंद करने का टाइम था तो चेयर टेबल सब अपनी जगह पर लगा रहे थे बस मेरे लिए एक टेबल चेयर छोड़ दिया. ढाबे के बंद होने का टाइम देखकर मुझे ही थोड़ा बुरा लगा. मैंने उनसे बोला मेरी वजह से आपको देरी हो रही होगी. नही आप आराम से बैठो बोलकर वो रुक गए.

थोड़ी देर बाद फिर हिचकिचकार बोले “मैडम आप बैठिये यहाँ पर आराम से पर अगर बारिश नही रुकी तो आप मेरे घर पर भी रुक सकती है. घर पे मैं, मेरी Mrs और छोटा बच्चा है. बस आधा km है घर. बाहर वो बड़ी गाड़ी मेरी ही है उस से चले जाएंगे. एक रात की बात है आप हमारे घर मे एडजस्ट कर लीजियेगा. बाइक आप यहाँ ढाबे पर छोड़ सकती है,2 लड़के यही सोते है तो चिंता की बात नही”.

अब चिंता का तो मैं उनको क्या बता ती. चिंता का तो ऐसा है कि मैं ज्यादा करती नही खासकर सफर में क्योंकि सफर में जब भी मुसीबत आयी है अनजान से लोगो ने अपना बनकर मदद की है. आज भी कुछ वही हो रहा था.

Maker:0x4c,Date:2017-10-29,Ver:4,Lens:Kan03,Act:Lar01,E-Y

किशोर और मेरी बातें चल ही रही थी तभी ढाबे के लड़के खाना खाने बैठे. किशोर ने भी मुझे खाने के लिए पूछ लिया “मैडम कुछ खाया है आपने, लेंगी आप कुछ”. मूड ठीक नही होने की वजह से सुबह से ही मैंने कुछ खाया नही था और ना खाने की इच्छा भी हो रही थी पर उन्होंने इतने प्यार से पूछा कि मुह से हा ही निकला. फटाफट उन्होंने गरम गरम दाल और रोटियां लगाई और उतने ही फटाफट मैं खा भी गयी. रोटियां खत्म होती देख किशोर आकर बोले भी “मैडम और रोटी लगा दु. चावल खत्म हो गए है. रोटियां लगा देता हूं”.

कोई फॉर्मैल्टी नही थी. खाना खत्म होते होते बारिश बहुत हल्की हो गयी थी. 11.30 बज चुके थे फिर भी मैंने यवतमाल निकलने की ठानी, कुछ 36 km ही था क्योंकि वहाँ से यवतमाल.मैं बैग उठाकर पैसे देने के लिए उठी.किशोर तब किचन में थे उनके कोई पहचान वाले ढाबे पर आ गए थे बारिश की वजह से. उनके लिए कुछ बना ने के लिए.

मैंने किशोर से खाने के पैसे पूछे जो उन्होंने लेने से बिल्कुल इनकार कर दिया. “मैडम आज का खाना हमारी तरफ से था,अगली बार कभी फिर आ जाना आप तब पैसे लूंगा”.

IMG_20180608_231600

ऐसी कोई मेरी राइड या कोई सफर याद नही जहाँ मुझे ऐसे अच्छे लोग नही मिले. मेरा सफर पूरा होता ही है इन लोगो से. इन जैसे लोग ही मेरा सफर यादगार बनाते है और मेरे सफर को दिल से जोड़ते है. आज फिर ऐसी ही एक याद लेकर मैं बढ़ी आगे यवतमाल के लिए.

ऐ लड़की फिर से सुनो तुम

हा मैंने कहा था
ऐ लडक़ी,सुनो तुम
निकलो घर के बाहर
निडर बनकर
लेती हूं आज अपने शब्द वापस
और करती हूं गुज़ारिश…

ए लड़की सुनो तुम
ये भूल ना करना,
अपने घर से
बाहर ना निकलना
तुम सोच के निकलोगी
दुनिया बदलनी है
वो सोच के बैठे है
जिस्म नोचना है
और नोचेंगे भी.

जब इज़्ज़त तुम्हारी लूट जाए
सोचोगी,उसके बाद ही शायद
कोई आवाज़ उठ जाए
मेरे गुनहगार को सज़ा मिल जाये
और गुनाह सोचने वाले भी
दहशत में आ जाये
इंसाफ बस मेरा नही
तो हर लड़की का हो जाए
बिना डरे उसे जीने का मौका मिल जाए

पर बता दु तुम्हे,
हर हादसों के लिए हंगामा नही होता
हर किसी के लिए
हर कोई नही रोता
कहते है कुछ लोग
हादसे तो कितने होते है हर रोज़

तुम रानी थोड़ी हो
जो खून खौल जाए
तुम राम रहीम थोड़ी हो
जो शहर जला दिया जाए
या तुम गाय भी नही हो
जो हंगामा किया जाए
मेरे धर्म की भी तो नही
जो जवाब मांगने बैठ जाए

और कहा किसने था
तुम्हे घर से निकलने
क्या पढ़े नही थे तुमने धर्म के शास्त्र
युही दादी नानी थोड़ी कहती थी
बचके रखने की सलाह देती थी
रसोई घर तक ही रहना
अपनी जिंदगी वही तक समेटना

आज भी तो वही कहते है
“बेटी बचाओ”
फिर भी तुम नही मानी
अब सुनो,
अगली बार ये गलती ना करना
इज़्ज़त बचानी हो
तो घर से बाहर ना निकलना
तुम्हारा चीरहरण रोकने
अब कोई कृष्णा नही आएगा
ना ही कोई अल्लाह
गुहार का तुम्हारी जवाब दे पायेगा
उनके ही घरों में
भक्षक बैठे हैं
उनके ही भक्त
भक्षक बने बैठे है
जमीर हमारा किसीका ही
जिंदा बचा नही
तकलीफ में किसीके शामिल हो
हमारी जिंदगी में अब इतना वक़्त नही

शामिल हो भी गए तो
दो चार नारे लगा देंगे
कुछ कैंडल भी जला लेंगे
ये देख तुम्हारी हिम्मत शायद
फिर थोड़ी और बढ़ जाये
पंख फैलाने के
अरमान जाग जाए
बदलना देखो पर कुछ है नही
बच्ची, लड़की, औरत
किसी बात से इन्हें फर्क नही

कांड के बाद बस
कांड होते जाने है
फिर कटघरे में
जात धर्म,नेता अभिनेता
अमीर गरीब देखकर
गुनहगार ठहराए जाने है
और पहला गुन्हेगार
तो तुम ही रहोगी
इसलिए सुनो ऐ लड़की
तुम ये भूल ना करना
अपनी इज़्ज़त नीलाम करने
घर से बाहर ना निकलना

-स्नेहल वानखेड़े

#DontMixMyBodyAndReligion #JusticeforAsifa #JusticeForEveryRapeVictim #RightToLiveFreely #RightToLiveWithoutFear #IamHumantoo

चिखलदरा मेलघाट और बहुत कुछ

आ गए है हम हमारा यूट्यूब का पहला एपिसोड लेकर. आपको घुमाने ले चल रहे है हम चिखलदरा मेलघाट. वहाँ के सुन्दर नज़ारे, वहाँ के लोग उनकी संस्कृति और मिलाएंगे कुछ खास मेहमान से.

You Tube Channel

आ रहे है हम बहुत जल्द अपना यु ट्यूब चैनल लेकर ताकी आप जी सके वो कहानीया जो मैं अब तक आपको लिखकर सुना रही थी.पर इसकी वजह से मेरा लिखना बंद हो जाएगा ऐसा बिल्कुल नही.

अगर आपको प्रोमो पसंद आये तो सब्सक्राइब करना ना भूले. धन्यवाद 😊

 

 

संस्कृति का ब्याज

कुछ दिन पहले बैंक में मेरे पास एक माँ बेटी आए थे फैमिली पेंशन पर लोन लेने के लिए. बड़ी जल्दी थी उन्हें लोन की, 12 dec को बेटी की शादी है इसलिए.जिसकी शादी है BA फाइनल में कुछ सब्जेक्ट नही निकाल पायी इसलिए घर पर ही है. जो बेटी साथ आई थी वो BA पास है वो भी घर पर ही रहती है.

जब उनकी बेटी को बोला गया फॉर्म भरो “मुझे नही समझता कहकर टालने की कोशिश की” पर मैने फॉर्म भरकर देने से मना किया और बस नाम पता जन्म तारीख खाता क्रमांक इतना ही लिखना है, फिर भी कोई परेशानी आयी तो पूछ लो कहकर मैंने उसे फॉर्म दे दिया.फॉर्म हिंदी में रहने के बाद भी वो ठीक से भर नही पा रही थी. ये देखकर ही थोड़ा गुस्सा आया, मैने चिल्लाया भी की BA हो और बहुत ही बेसिक जानकारी भर नही सकती. जैसे तैसे उसने फॉर्म भरकर दिया.

उनका पहले ही एक लोन चालू था जो उन्होंने सबसे बड़ी बेटी के शादी के लिए लिया था. ये लोन लेने के लिए पुराना बंद करना जरूरी था. कुछ तीस हजार बाकी थे, उन्हें हमारे बैंक मैनेजर ने पहले बताया था कि उनको डेढ लाख लोन मिल सकता है,इसलिए वो खुशी से तैयार हो गए थे पुराना बंद करने के लिए. पर जब मैंने देखा तो बस 90 हज़ार ही उन्हें मिल सकते थे.जैसे ही उन्हें ये बताया माँ बेटी के चेहरे का रंग उड़ गया. बिनती करने लगे “मैडम 1 लाख तो भी कर दो,तीस हज़ार तो भरने में ही जा रहे है बस 60 हज़ार हाथ मे मिलेंगे”. मैनेजर से भी बिनती की पर होना कुछ था नही और गुस्सा मुझे अब इस बात का ज्यादा आ रहा था कि जब पैसे नही तो क्यों इतनी झूठी शान दिखाके शादी.

जब लोन अमाउंट 90 का तय हुआ तो “मैडम जल्दी करवा दो जरूरत है, ये 30 हज़ार बड़ी बहन के सब गहने गिरवी रखकर लाए है”. मैं अब कुछ बोलने वाली कौन, बस इतना बोल के की कल आ जाओ पैसे मिल जाएंगे तब तक पुराना खाता बंद कर दो बोलकर जाने के लिए कह दिया. उनका कहना हुआ कि “मैडम कल लोन सैंक्शन हो जाए एक बार फिर पुराना बंद करते है”. मैंने हा कर दी, वो चले गए. जब मैनेजर को सब तैयार करके फ़ाइल दी तो बोले “मैडम पहले पुराना बंद करवाओ फिर 2 दिन बाद सैंक्शन दूंगा”. आखरी फैसला तो आखिर उनका ही था.

अगले दिन माँ बेटी फिर बैंक आए 30 हज़ार लेकर. “मैडम हो गया क्या लोन पास”. मैंने उन्हें सब बताया जो मैनेजर ने कहा था. सुनते ही बड़े उदास हो गए, कहने लगे “मैडम इमरजेंसी है थोड़ा कर दो आज ही”. मैंने चिल्ला दिया “कोइ हॉस्पिटल में हो, किसी की तबियत खराब हो, बच्चे की पढ़ाई रुक गयी हो, वो होती है इमरजेंसी, यहाँ कौनसी इमरजेंसी आपकी”. जवाब आया “मैडम टाइम पे लड़के के घर पर हुंडा (दहेज) पहुँचाना भी इमरजेंसी है, हुंडा नही पहुँचा तो लड़की की शादी टूट जाएगी, ज़िन्दगी खराब”. मैं दंग, जब पूछा लड़का क्या करता है तो पता चला जिल्हा परिषद स्कूल में टीचर है, 1 लाख उसे हुंडा चाहिए था.शादी का खर्चा अलग जो वो अपने 12 एकर खेत मे से 3 एकर बेचकर निकालने वाले थे. बड़ी बेटी की शादी में भी 40 हज़ार का हुंडा दिया था. मेरे थोड़े बोलने पर की क्यों आप लोग बढ़ावा दे रहे हो इन बातों को, जवाब मिला “रिवाज़ संस्कृति है अपनी,समाज मे करना ही पड़ता है”. ये तो बस कॅश की बात थी बाकी जो देंगे वो अलग. फैमिली पेंशन और खेत पर घर चल रहा है और उसपे ये सब.

एक मैनेजर की हैसियत से टेबल संभालते हुए लोन अप्रूवल के लिऐ दु बस इतना कर सकती थी पर जो अपने सामने होता देख रही थी, उस माँ के चेहरे पे चिंता, लोन कम होने पर पसीना आना, बहन के गहने छुड़ाने की चिंता, शुक्रवार की जगह सोमवार को लोन होने वाला है सुनकर बैचैनी, इन्तेज़ार उसके लिए कुछ भी करना मुमकिन नही था.

ये परिवार यवतमाल के पास के एक छोटे से गांव से था. जहाँ पढ़ाई भी बस फॉर्मेलिटी तौर पर ही होती होगी. पर शहर में हम कहा कुछ नया कर रहे है. हम शहरी लोग अच्छे स्कूल अच्छे कॉलेज से पढ़ने के बाद भी इस प्रथा को आगे बढ़ा रहे है. कितने तो IIT, IIM, IAS officers खुले छूट अपना रेट डिसाइड करते है. समाज में झूठी शान के लिए पता नही कहा कहा से पैसे जोड़कर शादी लगाते है. खासकर लड़की वाले. बँक को तो अपने लोन का ब्याज मिलेगा ही, लेकीन इस महान संस्कृती का पुराना ब्याज क्या सिर्फ औरत ही भरेगी. इस महान पुरुषप्रधान, उच्चवर्गीय, सरंजामी संस्कृती का बोझ कौन सर पर ले रहा है ? रिती रिवाज, संस्कृती का विद्रुप रुप हमेशा गरीब लोगो में ही ज्यादा वेदना लेकर आता है. शादी के इस नये मार्केट मे ये ज्यादा से ज्यादा भयानक होते जा रहा है.  हमेशा से ये होता आया है कोई भी बोझ लड़की को ही पहले उठाना पड़ता है, आज भी अगर वही हो रहा है, तो फिर किस दिशा में आगे बढ़ रहे है हम, और कौनसे आधुनिक भारत का जश्न मना रहे है हम.

Request Feedback

And The Journey Starts

10 days

3400 kms

Nagpur-Nirmal-Hyderabad-Bangalore-Chitradurga-Goa-Pune-Nagpur

Solo rider & a TVS Wego

It was 18th of December 2015,the day full of mixed emotions for me  ,the day of doubts ,excitement and a bit of reluctance. The day when my love for travelling and exploring overpowered my urge to stay with my brother, who had come all the way from Pune to meet me.Many felt ,how  could I cover so much distance and that too on a moped . I wanted to break those shackles created by our very own society about a single girl travelling on a moped with very limited resources.I am glad I did that.The entire experience was so enriching that I decided to write.The journey was indeed soul enriching. Here’s my experience straight from the heart!

18th dec- Day 1- 6.30 am the journey begins from Nagpur.First destination decided was Hyderabad.476 kms from Nagpur woh alag baat hai ki humne pehle hi din 550 kms chala liya.This was  my first time to embark on such a long journey.The first two hours of my journey went by feeling sleepy and dan in awe with the beautiful sunrise, it was an everyday sunrise because I travel the same route by bus to go to my office but the charm was multifold today.After the 2 hrs I took a  breakfast break in Jamb 65 kms from nagpur ,yes, I rode only 65 kms in 2 hrs.I believe in riding slow but this slow scared me,Hyderabad was real far.I entered the famous Ashok Hotel of Jamb, after placing order for the breakfast and doing some mental calculation of the distance and speed to reach Hyderabad by 6 pm, sipping a hot cup of chai ,I put on my headphones listened to matargashti ..I jus love DAT song did some matargashti myself oblivious to the people. After the not so satisfactory breakfast I hit the road again with determination.

Till Hinganghat the roads are  in very good condition 4 lane,smooth ride but after that till Adilabad its mostly single lane because of the on going construction and thanks to our previous  contractors who started the job dint complete it but on the other hand it got  delayed.Once you cross Maharashtra border the road gets better and again 4 lane.

After crossing Jamb rode continuously till Adilabad with only 15 mins break and 1 stop for petrol refill.

After Adilabad I started seeing the sign board of Nirmal where my Dada Bhabhi stay . I got excited that wow after inviting me so many times to come to their place I will be finally visiting them as I thought the town is on the highway but nope you need to take a small detour to visit Nirmal where it says Hyderabad 226 straight and Nirmal 22kms to right.But then whats the fun of riding a bike if we dont get the freedom of doing what we want to so the decision was made and simultaneously a surprise call was made “Bhabhi in 15 mins I will be home”.The road to Nirmal is good and the point from where Ghat starts the view is astonishing one can see 7 small rivers from there (I dont have any picture as I thought will click in return but took another route and not everything needs evidence,right). It was exciting to meet someone familiar in a completely new city and I got to eat awesome biryani with Bhabhi to make up to the boring breakfast while her dental patient is still waiting with half the treatment done and half remaining :p .Thanks to the patient or the lunch would not have been possible.

It was 3 pm and I bid adieu to Nirmal.

Hyderabad 222 kms,3 pm my heart was racing as i had never rode at night on highways was a bit apprehensive too but the best part is they have so many villages enroute so problems can be handled .After continuous journey of 4 hrs reached hyderabad but not the end of the story abhi toh bas city enter kiye ho destination nahi pohoche(Welcome to the Big City) and so the journey continued till 8.45pm.What I liked the most was it was so easy to reach the destination as people were so helpful and clear about the directions .”People were helpful” might sound strange to many but its true, whenever I travel alone people cared more and were more helpful it felt like its their responsibility to keep me safe.So with all the help on direction (Ya I dint use GPS,not very techsavy) 8.45 pm I reached Hotel Palazzo a very nice place to stay and again it was time for another surprise call to one of my friends the rockstar and actress  staying in Hyderabad.My friend was suppose to pick me up from a mall near to my hotel so I thought to take walk to the malI, I love to take walk in new cities as I feel I get to know that city more and you become part of that city. So when I planned to walk till the mall to my surprise the watchman walked with me till the end of the hotel lane as it was dark (I told you people are more helpful).So I reach mall and It was time to first get shocked to see your  friend in a Saree😝,then relive all the hostel memories,gossip and obviously much required selfie😊 the time was made more memorable by the  joining of anothet stylish star her husband,ek hi raat me do do star😊.And even after the tiring ride of 550 kms the chat continued till 1.30 am. This is the best thing I love while travelling meeting old and new people enroute creating new bonds surprising them listening to their stories creating new stories.

IMG-20151219-WA0000

So with all the Happiness in the heart and khatte mithe experiences it was time to doze off to start again next day for some more new experiences.